Sunday, March 21, 2010
भारतीय दिखावा पसंद राजनीती, जनता कहा जाये |
हाल ही के कुछ महनो में हम देख रहे है की भारत की राजनीती गर्त में जाती ज़ा रही है
एक और जहा हम देख रहे है की महंगाई बढती जा रही है वही दूसरी और नेताओ के गले में फूलो की जगह लाखो, करोडो रुपयों की मालाये डाली जा रही है
चारो और महंगाई का हाहाकार मचा हुआ है वही नेता केवल तुच्छ बयानबाजी कर रहे है या लोकसभा या विधानसभा में अपने निजी मुद्दों को लेकर लात घुसे चला रहे रहे है
पहले मराठी का मुद्दा था जिस पर नेता लड़ रहे थे अब महिला आरक्षण मुद्दे पर लड़ रहे है|
कुछ नेता अपने छेत्र को राज्य घोषित करवाने के लिए लड़ रहे है
जब की महंगाई से लड़ने के नाम पर केवल पुतले जलाये जा रहे है
किसान जहा गले में फांसी की माला डाल रहे है वही कुछ नेता तो अपने सम्मान में लाखो की मालाये डाल कर खुश हो रहे है |
अगर अमिताभ जी के डायलोग में बोला जाये तो आज खुश तो बहुत होगे आप लाखो की माला पहन के वो जिसने आप को यहाँ तक पहुचाया वो महंगाई का मारा मरने को तैयार है|
एक और जहा नेताओ की लोवर क्लास में सफ़र करने, होटल का खर्चा कम करने, सरकारी गाडियो का खर्चा कम करने की सलाह दी जा रही है वही कुछ नेता इसे कटल क्लास कह कर आम आदमी का मजाक उड़ा रहे है. चारो और हाहाकार मचा में महंगाई है लेकिन हम एसी कमरे में बैठ कर आई पी एल का मजा ले रहे है
हमारे नेता देखावा पसंद है इस लिए चार्टर प्लेन या खुद का हलिकोप्तर ले रहे है |
हमारे नेताओ को अपने आप को बदलना होगा और झूठा शान का दिखावा छोड़ना होगा | अगर वो ऐसा नहीं करते है तो आने वाले चुनाव में उनहे मुह की खानी पद सकती है क्यों की अब जनता जागरूक हो चुकी है |
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